Latest Event Updates

राजनीतिक पतन की पराकाष्ठा हो चुकी है.

Posted on

Prakashchand Bishnoi..दोस्तों राजनीती कि पराकाष्ठा देखे। यदि देश कि खातिर कोई शहीद होता है
तो उसके परिवार को पुरुस्कार के रूप में सरकारी सहायता दी जाती जिससे
उसका परिवार शहीद कि अनुपस्थिति में दुखी न हो और जिसे भी पुरुस्कार दिया
जाता है वो अच्छे काम के लिए दिया जाता है लेकिन राजनीती में इस बार उन
लोगो के परिवारो को टिकट दिया गया है जिन्होंने घिनोनी वारदात कि
है..जैसे बाबूलाल नागर के भाई को टिकट महिपाल मदेरणा कि पत्नी को टिकट और
मलखान विश्नोई  कि माँ को टिकट … दोस्तों ये है राजनीती कि पराकाष्ठा
अब आप सोचे ऐसे राजनितिक दल देश को क्या देंगे… आज देश की दिशाहीन तथा
भ्रष्ट राजनीति के कारण ही ये सारी विसंगतियां पैदा हो रही है। आलेख में
… जिन्होंने कभी गरीबी देखी ही नहीं भला ऐसे लोगों से गरीबी रेखा
खिंचवाना गरीबों के साथ एक भद्दा मजाक है सोचो समझो विचार
करो…अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सबसे ज्यादा दुरूपयोग में आने वाला शब्द
है. हमको समझाया जाता है कि भारत एक लोकतंत्र है. हमारा लोकतांत्रिक
संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है. लेकिन क्या संविधान
प्रदत्त यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देश के टुकडे टुकडे करने की आज़ादी
भी देती है. ये है राजनीती।

लाधुराम विश्नोई के नमोलेखन मेँ दिखा 36 काँम जातियो का तेवर

Posted on

गुड़ामालानी - भाजपा प्रत्याक्षी श्री लादुराम विश्नोई ने हजारो समर्थको के साथ उप
निर्वाचन अधिकारी के सुमुख पर्चा दाखिल किया -  स्थानीय रावणा राजपूत समाज
के भवन पर सुबह से ही भीङ एकत्रित होने लगी। जुलूस के रुप मेँ विश्नोई 36
काँम के साथ मुख्य बाजार से होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे। जहां पर
नामांकन दाखिल किया।Image सभा में सभोधित करते हुऐ कहा कि में हार से डरने
वाला इंसान नहीं हार जीत तो राजनीती का खेल है. ये एक आप कि सोच है कि
में हार के बावजूद आप आप के सामने आ रहा हु. कुछ तो आप को महसूस का अंदाज
होना चाहिए कि में क्या आना चाहता हु मेरा राजनीती आना गॉंव गॉंव और ढ़ाणी
ढ़ाणी में जागरूक्ता और विकास कि क्रांति लाना चाहता।आप  कि समस्याओं और
मांग का समाधान करू….धरती का कर्ज चुकाना है।  हाथ का राज हटाना है ।
धोरा धरती की गोद में ,, अब कमल आप को  खिलाना है। गुड़ामालानी विधानसभा
की समस्त जनता से आह्वान करना चाहता हुँ.

मंच अनेकों विशिष्ट जनों से सुसोभित था इस मौके पर भाजपा के उपाध्य्क्ष
नंदा डगला ने कहा कि देश कांग्रेस के भ्रष्टाचार से परेशान है। इस बार
भाजपा प्रत्याशी को भारी मतो से विजयी बनाए ताकि विकास कार्य करवाए जा
सके, किसानो भाईयो को 8 घटे घरेलू 24 घटे बिजली नर्मदा नहर का पानी
किसाने खेतो तक पहुचेँ समुचित सिचाई का सही मूल्य तथा फसल बीमा सभी युवा
को कार्य एवम रोजगार दिलायेगे  कहा कार्यकर्ता एकजुट होकर भाजपा को विजयी
बनाए। इस मौके पर राणा कुलदीपसिँह, मंडल महामंत्री पुरुषोत्तम जैन, भाजपा
युवा नेता सांवलारा म पटेल, सुखदेव लामरोङ,राजेश कङवासरा, तेजसिंह लूणवा,
अशोक सिँह,रघुवीर अग्रवाल, गोविन्द तेतरवाल समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

सोशल मीडिया नेटवर्क रिपोटर  प्रकाशचंद बिश्नोई – धोरीमन्ना
Mobile No.9967207809 / 9610311129

सुखराम बिश्नोई के समर्थन में विशाल गठबधंन का घेरा

Posted on Updated on

सांचोर – राजकीय उच्च मध्य्मीक विधालय में कोंग्रेस नेता सुखराम बिश्नोई
के समर्थन में विशाल गठबधंन का घेरा कंधे से कन्धा मिलाकर कोंग्रेस
पार्टी का हाथ मजबूत बनाने का आह्वान किया। उपस्थित भारी जनसमूह को
संबोधित करते हुए बिश्नोई ने कहा कि यह समय उचित-अनुचित परखने का समय है
और इस वक्त का निर्णय  हमारे भविष्य की खुशहाली का मार्ग प्रशस्त करेगा।
मुझे धन्ये है आप आप लोगों पर – टिकट मिलेगी आप के सहयोग से जो कम किया
वो आप साथ मिलकर किया आगे करता रहूँगा। जनता ही मेरी प्यार है यही मेरी
पुकार है.Image

प्रधान – डॉ शमशेर अली – लोकतंत्र मजबूत तभी हो सकता है जब सब लोग इसमें
हिस्सेदार हो हमें भरोसा है आप के विश्वास पर यह सुखराम जी को जीत विजय
बनाने मोका अपने इस क्षेत्र योग्य के अनुसार विकाश काफी वंचलित रहा है,
तो हमें सोचना कि गाँव का मुखड़ा गौरव होगा तो हम भी हम गर्व रहगे। हम
सोचेगे तो हमारा समाज सोचेगा इस तर्की का गुणगान करो.
विश्नोई के प्रखर व्यक्तित्व की चर्चा करते हुए आगामी रणनीति के बारे में बताया।

सभा को चितलवान प्रधान मनीषा मेघवाल, नगरपालिका चेयरमैन रमेश मेहता,
ब्लॉक अध्य्क्ष गणपतसिंह चौधरी, अवतारसिंह हरयाली,उम्मेदाराम, ऐडवोकेट
गंगाराम, यूवा  महासचिव अर्जुन देवासी, अखेदान  चारण , सरपंच रामावतार,
पूर्व बीईई ओ राणाराम, कई गणमान्य उपस्तिथ थे.

सांचोर कि गली गली में मौजूदी कोंग्रेस के कार्यकर्ताओ और मतदाताओ चुनावी
बिगुल बजाया  ढोल नगाड़े बजाकर  साचोर कि सिटी कोंग्रेस कि मुहार लगाई,
सुखराम जी आप आगे बढ़ो हम आप के साथ है. सांचोर कि जनता का ध्यान पार्टी
कि और था. राजकीय उच्च मध्य्मीक विधालय का मैदान को अफरा तफरी मचा दी
पार्टी के नारों कि गुंजार थी. सभा  में सभी समाज के प्रवासी मतदाताओ की
संख्या २५००० हजार से ज्यादा थी।

राजस्थान पर होगा वसुंधरा राजे का कब्जा…

Posted on

राज्‍यों में विधानसभा चुनावों को लेकर कई तरह के ओपिनियन पोल सामने आ रहे है। ऐसे में ”आज तक” भी ओआरजी के साथ मिलकर एक ओपनियिन लाया है जिसके अनुसार इस बार के चुनाव बेहद दिलचस्‍प होने वाले हैं. तो जानें कि अगर आज हों चुनाव तो किस राज्‍य में किसकी बनेगी सरकार…

सर्वे का वक्‍त 16 से 26 अक्‍टूबर
राजस्थान कांग्रेस के लिए नाक का सवाल बन गया है पर जिस तरह के आंकड़े सामने आएं हैं। उससे पार्टी की मुश्किल और बढ़ती हुई नजर आ रही है। सर्वे के मुताबिक जनता ने अशोक गहलोत की सरकार को नकार दिया है. यानी वसुंधरा राजे के नेतृत्व में बीजेपी बहुत तेजी से सत्ता की ओर बढ़ रही है।ओपिनियन पोल के मुताबिक, 38 फीसदी मतदाता बीजेपी की सरकार के पक्ष में हैं। वहीं कांग्रेस के पक्ष में 35 प्रतिशत और अन्य व निर्दलीय उम्मीदवार 27 फीसद वोट हासिल करने में कामयाब रहेंगे। इन नतीजों को सीटों में तब्दील करने से साफ होता है कि 200 सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा में बीजेपी 105 सीट जीतेगी। वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस को सिर्फ 76 सीटों से संतोष करना पड़ेगा और अन्य कैटेगरी में 27 सीट जाने की संभावना है।ashok-gahlot-cm-vashundhara-raje

बिग न्यूज़ ‘पेशाब पीने को किया जाता था मजबूर’

Posted on

बसपा सांसद धनंजय की नौकरानी के हत्या के मामले में नए और रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं।

अस्पताल में भर्ती दूसरी नौकरानी मीना ने मजिस्ट्रेट के सामने कहा कि सांसद का तीन वर्ष का बेटा अगर पेशाब करते वक्त रो जाता था, तो जो नौकर या नौकरानी उसे पेशाब कराने ले गया है, उसे पेशाब पीने पर मजबूर किया जाता था।

वहीं नाबालिग नौकर के बयान पर चाणक्यपुरी थाना पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है उसका एक-एक पन्ना क्रूरता की कहानी से रंगा है।

नाबालिग ने कहा है कि ठीक से खाना नहीं बनाने पर जागृति ने राखी की झाडू़ से पिटाई करके बाल काट दिए थे। एक बार राखी को इतना मारा गया था कि डंडा ही टूट गया।

इन तथ्यों से सांसद दंपति की मुश्किलें और बढ़ती दिख रही हैं। पुलिस सांसद के खिलाफ आईपीसी की धारा 120बी यानी हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने की और जागृति पर पोक्सो व यौन शोषण की धराएं लगाने पर विचार कर रही है।

नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त एसबीएस त्यागी ने बताया कि इस पर फिलहाल कानूनी सलाह ली जा रही है।

नई दिल्ली जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नौकरानी मीना ने अपने बयानों में कहा है कि सांसद भी मारपीट करते थे, हालांकि वह क्रूर तरीके से नहीं मारते थे। सिर्फ हाथापाई करते थे।

सांसद को ये जानकारी थी कि डॉ. जागृति मारपीट करती है, मगर उन्होंने कभी जागृति को रोकने का प्रयास नहीं किया। मीना ने ये भी कहा है कि कई बार ऐसा लगता था कि सांसद भी अपनी पत्नी से डरते थे।

पुलिस सांसद पर 120बी लगाने पर इसलिए भी विचार कर रही है क्योंकि कई सवाल अनसुलझे हैं और उन पर शक पैदा करते हैं, जैसे सांसद ने सीसीटीवी क्यों हटाए, मीना को उसके रिश्तेदारों के पास क्यों भेजा।

उन्होंने जौनपुर से ही पुलिस को जानकारी क्यों नही दी? बहरहाल इस घटना में एक खास बात ये भी है कि चार दिन बीतने के बाद अभी तक नौकरानी राखी के शव के पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड नहीं बन सका है। हालांकि पुलिस का कहना है कि शुक्रवार को पोस्टमार्टम होगा।

थाने में ही तू-तू मैं-मैं
सांसद धनंजय सिंह व उनकी पत्नी जागृति का झगड़ा चाणक्यपुरी थाने में भी जारी है। नई दिल्ली जिला पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सांसद दंपति से बृहस्पतिवार को आमने-सामने बैठाकर करीब चार घंटे पूछताछ की गई। इस दौरान दोनों आपस में झगड़ते रहे।

पत्रकारिता का भविष्य क्या होगा?

Link Posted on

पत्रकारिता का भविष्य क्या होगा?

प्रकाशचंद बिश्नोई - आज के पत्रकार सब के बारे में लिखने लगे है.

जहाँ सच्चाई दिखी, भगने लगे है
अब कलम का काम तो कम हो गया है.
मोबाईल, कमरा का जमाना हो गया है.
हर किसी से इंटरव्यू लेने के लिए समय हो गया है
जो समय न दे वह दुश्मन हो गया है.
पत्रकार समाज सेवा व कर्तब्य से पिछ्लने लगे है.
दिनभर चाय क़ि तलाश करते है. शाम को महफिल में गिलास का जम पकड़ने लगे है.
आज के पत्रकार सब के बारे में लिखने लगे है.
जो देते नही नगद या विज्ञापन उसको, भ्रष्ट बेईमान कामचोर कहने लगे है.
पत्रकारिता एक मिशन था, पत्रकार कानून का रक्षक था ..
अब होटल, रिक्शा, हाथ ठेला व पेपर बाटने बाला पत्रकार लिखने लगे है.
गांधी की पत्रकारिता के उस काल से लेकर आज की पत्रकारिता के बीच बदलावों का एक बड़ा दौर रहा है. सुविधाओं व संसाधनों के दृष्टि से आज की पत्रकारिता काफी हद तक सहज एवं सुलभ हो गयी है. आज बेशक पत्रकारिता तकनीक संपन्न हो गयी है लेकिन वर्तमान पत्रकारिता के स्वरूप  पर सवाल भी कुछ कम नहीं उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही उठता है कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में पत्रकारिता ने कहीं गांधीवादी पत्रकारिता के उन आदर्श मूल्यों को तो हाशिए पर नहीं ला दिया है जिसके बिना ‘पत्रकारिता’ शब्द ही अर्थहीन नजर आता है. आज पत्रकारिता को लेकर जिस तरह के सवाल आये दिन उठते रहते हैं, ऐसे में क्या यहां भी गांधी प्रासंगिक नहीं हो जाते हैं?Image

राष्ट्रीय होने निकली हिन्दी की अखबारीपत्रकारिता के लिए अगर कोई आदिपुरुष है. सत्य और अहिंसा के प्रतिमान बन चुके गांधी और उनके दर्शन की प्रासंगिकता न सिर्फ  भारत बल्कि अफ्रीका सहित दुनिया के तमाम देशों में आज भी कायम है. गांधी के सत्य-अहिंसा के नैतिक मूल्यों पर तो न जाने कितनी बहसें होती रही हैं, न जाने कितना कुछ लिखा जा चुका है मगर सामयिक संदभरे में उनके व्यक्तित्व का एक अन्य महत्वपूर्ण पक्ष भी बहुत विचारणीय है. वह पक्ष है पत्रकारिता संबधी उनके सरोकार. अहिंसा के पथ-प्रदर्शक, सत्यनिष्ठ समाज सुधारक और महात्मा के रूप में विश्व विख्यात गांधी सबसे पहले कुशल पत्रकार थे. उनकी पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का प्रयास किया जाए तो वह व्यावहारिक पत्रकारिता के स्तंभों में अग्रणी नजर आते हैं.

पत्रकारिता में गांधी के योगदान की ऐतिहासिकता पर नजर डालें तो उनकी पत्रकारिता की शुरु आत ही विरोध की निडर अभिव्यक्ति के तौर पर हुई थी. जब गांधी अफ्रीका में वकालत कर रहे थे, उसी दौरान वहां की एक अदालत ने उन्हें कोर्ट परिसर में पगड़ी पहनने से मना कर दिया था.अपने साथ हुए इस दोहरेपन का विरोध करते हुए गांधी ने डरबन के एक स्थानीय संपादक को चिट्ठी लिखकर अपना विरोध जाहिर किया, जिसको उस अखबार द्वारा बाकायदा प्रकाशित भी किया गया. अखबार को लिखे उस पत्र को गांधी की पत्रकारिता का पहला कदम माना जा सकता है हालाकि  तत्कालीन दौर में गांधी को भारत में भी कोई नहीं जानता था

उनके गांधीवादी सिद्धांतों के मानकों पर ही आधारित है. उनकी पत्रकारिता में उनके संघर्ष का बड़ा व्याहारिक दृष्टिकोण नजर आता है. जिस आमजन, हरिजन एवं सामाजिक समानता के प्रति गांधी का रुझान उनके जीवन संघर्ष में दिखता है, बिल्कुल वैसा ही रुझान उनकी पत्रकारिता में भी देखा जा सकता है. गांधी का मानना था कि पत्रकारिता की बुनियाद सत्यवादिता के मूल चरित्र में निहित होती है. असत्य की तरफ उन्मुख होकर विशुद्ध व वास्तविक पत्रकारिता के उद्देश्यों को कभी प्राप्त नहीं किया जा सकता है. गांधी का यह दृष्टिकोण इस बात की पुष्टि करता है कि उनकी पत्रकारिता और व्यावहारिक जीवन के सिद्धांतों में किसी भी तरह का दोहरापन नहीं है. निश्चित तौर पर अपने सिद्धांतों एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में किये गए कार्यों के बीच का सामंजस्य ही गांधी को पत्रकारिता के महान मार्गदशर्क के रूप में स्थापित करता है.

कहीं यह सच तो नहीं कि हमने अपनी सहूलियत और निजी हितों को ऊपर रखकर गांधी की पत्रकारिता के उन मूल्यों को सामने ही नहीं आने दिया, जिनका सामने आना वर्तमान पत्रकारिता के बिगड़ते स्वरूप के लिए सबसे जरूरी जान पड़ता है. गांधी द्वारा पत्रकारिता के क्षेत्र में जो आदर्श स्थापित किये गए, वह अपने आप में पत्रकारिता के स्थापित और प्रामाणिक सिद्धांत कहे जा सकते हैं. भारतीय ही नही, विश्व के पत्रकारिता जगत को चाहिए कि वह  गांधी को महज महात्मा तक सीमिति न कर ‘पत्रकार गांधी’ के मूल्यों, आदर्शों व सिद्धांतों को भी पढ़ें-समझें और आत्मसात करें. यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का कल्याणकारी पक्ष है.

बाड़मेर जैसलमेर भाजपा उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय नहीं

Link Posted on

बाड़मेर जैसलमेर भाजपा उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय नहीं

गुडामालानी में लादूराम विश्नोई पर सहमति 
 
बाड़मेर भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती वसुंधराजे की अध्यक्षता में गुरूवार को जयपुर में हुई चुनाव समिति की बैठक में बाड़मेर जैसलमेर के संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा की गई ,बाड़मेर की गुडामालानी से लादू राम विश्नोई पर सहमति हो गयी। शिव विधानसभा में पूर्व संसद मानवेन्द्र सिंह की पसंद का उम्मीदवार होगा। बाड़मेर में प्रियंका चौधरी सहित कुछ गैर जाट नामो पर चर्चा हुई। बायतु में दोनों उम्मीदवारों के बीच पनपे असंतोष के कारन तीसरा विकल्प तलाशने की जरुरत बताई। सिवान में कान सिंह ,हमीर सिंह के नामों पर चर्चा हुई। शिव में तरुण राय ,काग पूरा राम मेघवाल पर ,पचपदरा में अमराराम चौधरी के नाम पर चर्चा हुई ,वाही जैसलमेर में छोटू सिंह और रणवीर सिंह। पोकरण में शैतान सिंह के नाम पर चर्चा हुई ,चुनाव समिति की ग्फ्होशाना एक दो दिन में होने के बाद उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम मोहर लगेगी